उस पल को गले लगाने को ( Us Pal Ko Gale Lgane Ko ) | Hindi Nature ( प्रकृति ) Poetry by Aaditya Mishra | Nature Flavour | Aadi Flavour
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प्रकृति का हर रूप ये अनुपम
मेरे जिस्म को पुलकित करता है
अन्तः मन की खुशियों को
चहुओर ये छलकित करता है
छलक छलक बारिश की बूंदे
नदियों में जाकर बहती है
चली सुनहरी हवा की लहरें
कानों से कुछ कहती है
मधुर राग फिर पशु पक्षी की
दिल मे संजाल बिछाते है
आसमां के चंदा तारे तो
अपनों की याद दिलाते है
धरती और हरियाली प्यारी
दिल में एक घर बनाती है
श्रृंगार के इस सागर में
मेरी प्यास भी बढ़ती जाती है
प्यास बुझाने चाहता मैं
वहीं अटल हो जाने को
बस रुक हाथ फैला
उस पल को गले लगाने को
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